Folk Stories of the World
Friday, February 17, 2017
Wednesday, September 28, 2016
Ek kahani pakistan ki. One story from Pakistan.
पाकिस्तान एक मुल्क है जो भारत के पड़ोस में है। इसकी उत्तर में हिमालय की श्रृंखलाएं और खूबसूरत घाटियां हैं। तमाम फ़र्क़ और फ़िक्र के बावजूद इस मुल्क में कुछ ऐसी जगहें हैं जो हर तरह के मुश्किलों और सियासत के रहते अपनी जगह आज भी अपनी रहस्यमय खूबसूरती लिए क़ायम हैं।
शानदार घाटियों और शहरों और रेगिस्तानी चढ़ाइयों से होते हुए पाकिस्तान का इतिहास और संस्कृति पौराणिक लोक साहित्य और दन्त कथाओं से भरा पड़ा है।
आइये इन अजीबोगरीब किवदंतियों में वक़्त की एक डुबकी लगाएं
एक झील सैफुल मलूक
ये झील एक पहाड़ पर है, खगान घाटी में। यहाँ जो भी आता है मदहोश हो जाता है इसकी प्राकृतिक खूबसूरती में के जैसे हैरत और तारीफ से भर के इंसान बस देखता ही रह जाये। मगर यहाँ आकर सिर्फ इंसान ही अपने होश गुम नहीं कर देता है, एक मिथक के अनुसार कहते हैं की चौदहवीं के चाँद में आसमान से परियां इस झील पे उतरती हैं नहाने के लिए जिसमे उनका यौवन और खूबसूरती और भी निखार जाती है।
इस झील से एक प्रेम कहानी भी जुडी हुई है
एक बार एक राजकुमार सैफुल मलूक घूमते फिरते इस झील तक पहुच गया, फिर उसने क्या देखा की एक बेहद खूबसूरत परी झील के पानी पर ख़ुशी से झूम रही है। इतनी सुन्दर परी को सामने देखकर राजकुमार मूर्ति सा खड़ा रह गया, उसने कभी इतने खूबसूरत एहसास की कल्पना भी नहीं की थी। राजकुमार ने परी के कपडे चुरा लिए। और शर्त रखी के जबतक परी राजकुमार से शादी के लिए हाँ नहीं कर देती वो कपडे वापस नहीं करेगा। मासूम परी ने ये शर्त मान ली और शादी के लिए राज़ी हो गयी। ये कोई मामूली परी नहीं थी, ये परियों की रानी थी और सभी परियों में सबसे अधिक बुद्धिमान और सुन्दर थी। राजकुमार और परी एक दूसरे के प्यार में डूब गए। मगर इस रिश्ते से रानी का पुराण आशिक़ जो की एक शैतानी ताक़त था, बहुत गुस्सा हुआ और उसने पूरी घाटी को बाढ़ के पानी से भर दिया और परियों की रानी ऊँचे पहाड़ों में कहीं फस गयी। जब पानी काम हुआ तो राजकुमार ने घाटी में जगह जगह जाकर अपनी परी को ढूंढा मगर वो न मिली। राजकुमार अपने प्यार को वापस देखने के लिए इंतज़ार ही करता रह गया
अब इस मिथक के दो रूप हैं। एक में कहा जाता है राजकुमार की आत्मा आज भी पूर्णिमा में इस झील पे आती है और अपने प्यार का इंतज़ार करती है।
दूसरी ओर लोग ये भी कहते है की राजकुमार ने आखिरी दम तक हिम्मत दिखाई, शैतान से लड़ा और अपनी परी को उसके चंगुल से आज़ाद करा के वापस अपने पास ले आया।
शानदार घाटियों और शहरों और रेगिस्तानी चढ़ाइयों से होते हुए पाकिस्तान का इतिहास और संस्कृति पौराणिक लोक साहित्य और दन्त कथाओं से भरा पड़ा है।
आइये इन अजीबोगरीब किवदंतियों में वक़्त की एक डुबकी लगाएं
एक झील सैफुल मलूक
ये झील एक पहाड़ पर है, खगान घाटी में। यहाँ जो भी आता है मदहोश हो जाता है इसकी प्राकृतिक खूबसूरती में के जैसे हैरत और तारीफ से भर के इंसान बस देखता ही रह जाये। मगर यहाँ आकर सिर्फ इंसान ही अपने होश गुम नहीं कर देता है, एक मिथक के अनुसार कहते हैं की चौदहवीं के चाँद में आसमान से परियां इस झील पे उतरती हैं नहाने के लिए जिसमे उनका यौवन और खूबसूरती और भी निखार जाती है।
इस झील से एक प्रेम कहानी भी जुडी हुई है
एक बार एक राजकुमार सैफुल मलूक घूमते फिरते इस झील तक पहुच गया, फिर उसने क्या देखा की एक बेहद खूबसूरत परी झील के पानी पर ख़ुशी से झूम रही है। इतनी सुन्दर परी को सामने देखकर राजकुमार मूर्ति सा खड़ा रह गया, उसने कभी इतने खूबसूरत एहसास की कल्पना भी नहीं की थी। राजकुमार ने परी के कपडे चुरा लिए। और शर्त रखी के जबतक परी राजकुमार से शादी के लिए हाँ नहीं कर देती वो कपडे वापस नहीं करेगा। मासूम परी ने ये शर्त मान ली और शादी के लिए राज़ी हो गयी। ये कोई मामूली परी नहीं थी, ये परियों की रानी थी और सभी परियों में सबसे अधिक बुद्धिमान और सुन्दर थी। राजकुमार और परी एक दूसरे के प्यार में डूब गए। मगर इस रिश्ते से रानी का पुराण आशिक़ जो की एक शैतानी ताक़त था, बहुत गुस्सा हुआ और उसने पूरी घाटी को बाढ़ के पानी से भर दिया और परियों की रानी ऊँचे पहाड़ों में कहीं फस गयी। जब पानी काम हुआ तो राजकुमार ने घाटी में जगह जगह जाकर अपनी परी को ढूंढा मगर वो न मिली। राजकुमार अपने प्यार को वापस देखने के लिए इंतज़ार ही करता रह गया
अब इस मिथक के दो रूप हैं। एक में कहा जाता है राजकुमार की आत्मा आज भी पूर्णिमा में इस झील पे आती है और अपने प्यार का इंतज़ार करती है।
दूसरी ओर लोग ये भी कहते है की राजकुमार ने आखिरी दम तक हिम्मत दिखाई, शैतान से लड़ा और अपनी परी को उसके चंगुल से आज़ाद करा के वापस अपने पास ले आया।
Thursday, September 22, 2016
Ek kahani Mongol Ki. One Story from Mongolia
हलाकू खान की कहानी बड़ी दिलचस्प है. नाम सुन के लगता है की जैसे किसी खतरनाक से इंसान की बात हो रही हो।
हलाकू, यानी जो मार के हलाक़ कर दे। #ghengiz khan, #changez khan, #mongol history
पता नहीं उसका ये नाम किस ने रखा था लेकिन ये बात सच है की वो एक मंगोल लड़ाका था, वो चंगेज़ खान का पोता था। चंगेज़ खान के बेटे तावली खान के तीन बच्चे थे जिनमे एक मंगोल खान था जिसने काराकोरम की पहाड़ियों में अपना महल बनाया था और वहीं से अपनी पूरी मंगोल सल्तनत पे नज़र रखता था। दूसरा बच्चा था क़ुबलाई खान। जिसने चीन में अपनी फ़ौज के साथ डेरा रखा था और तीसरा लड़का हलाकू खान था।
मंगोल खान के इलाके से शुमाली ईरान का कुछ हिस्सा जुड़ा था जहाँ एक इस्माइली गिरोह हषाशीन ने लोगो को बड़ा परेशान कर रखा था। चूँकि ये इलाक़ा मंगोलों की हुकूमत के दायरे में पड़ता था इसलिए वहां के लोगों ने मंगोल खान से फर्याद की के उनको इस गिरोह से छुटकारा दिलाया जाये। मंगोल खान ने तुरंत अपने बाशिंदों की फरियाद सुनी और हलाकू खान को ईरान का हाकिम बना कर भेजा और इस्माइली गिरोह को दबाने का काम दिया। हलाकू खान ने अपनी चालाकी और बहादुरी के साथ हमेशा के लिए इस गिरोह का नाम ओ निशान मिटा दिया और उस इलाके पे मंगोलों का कब्ज़ा और भी मज़बूत कर दिया।
इस्माइलियों का खात्मा करने के बाद हलाकू खान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बग़दाद की ओर कूच कर गया। बग़दाद में उन दिनों बड़े झगडे फसाद होते थे। हलाकू की फौजों ने बगदाद पे कब्ज़ा कर शहर लूट लिया, बगदाद के बाद बसरा और कूफ़ा नाम के शहरों को भी बर्बाद कर डाला। इन शहरों में इतना भी नहीं बचा था की सौदागर कोई मामूली कारोबार भी कर सकें। हलाकू की मंगोल फ़ौज से पूरी दुनिया थर्राने लगी। लेकिन हलाकू की भूख फिर भी कम नहीं हुई और उसने शाम देश को निशाना बना डाला। लगातार मिल रही कामयाबियों से हलाकू की हिम्मत बहुत बढ़ गयी और उसने मिस्र देश पे हमला करने का मंसूबा बना डाला। मगर मिस्र और बग़दाद में फ़र्क़ था। मिस्र एक ताक़तवर मुल्क था और उसकी फ़ौज से हलाकू को हार का सामना करना पड़ा। मिस्री फ़ौज ने हलाकू को ऐसी शिकस्त दी, की हलाकू को शाम देश भी छोड़ना पड़ा। इस तरह मिस्र हलाकू की बर्बर मंगोल फ़ौज से बच गया। मगर ईरान हलाकू के हाथ में था जहाँ हलाकू खान ने अपनी मुस्तक़िल हुकूमत क़ायम कर ली।
इस तरह हलाकू ने मंगोल ताक़त का परचम मरते दम तक लहराया और सारी दुनिया ये जान गयी की मंगोल कितने ताक़तवर होते हैं। और मंगोल ताक़त चंगेज़ खान के साथ ही ख़त्म नहीं हो सकती बल्कि उसके पोते और मंगोल नस्ल का हर फौजी दुनिया को अपनी बर्बर ताक़त का जब चाहे स्वाद चख सकता है। हलाकू खान की बर्बरता के किस्से और उसकी लूट के कारनामे आज भी घर घर में सुने सुनाये जाते हैं।
हलाकू, यानी जो मार के हलाक़ कर दे। #ghengiz khan, #changez khan, #mongol history
पता नहीं उसका ये नाम किस ने रखा था लेकिन ये बात सच है की वो एक मंगोल लड़ाका था, वो चंगेज़ खान का पोता था। चंगेज़ खान के बेटे तावली खान के तीन बच्चे थे जिनमे एक मंगोल खान था जिसने काराकोरम की पहाड़ियों में अपना महल बनाया था और वहीं से अपनी पूरी मंगोल सल्तनत पे नज़र रखता था। दूसरा बच्चा था क़ुबलाई खान। जिसने चीन में अपनी फ़ौज के साथ डेरा रखा था और तीसरा लड़का हलाकू खान था।
मंगोल खान के इलाके से शुमाली ईरान का कुछ हिस्सा जुड़ा था जहाँ एक इस्माइली गिरोह हषाशीन ने लोगो को बड़ा परेशान कर रखा था। चूँकि ये इलाक़ा मंगोलों की हुकूमत के दायरे में पड़ता था इसलिए वहां के लोगों ने मंगोल खान से फर्याद की के उनको इस गिरोह से छुटकारा दिलाया जाये। मंगोल खान ने तुरंत अपने बाशिंदों की फरियाद सुनी और हलाकू खान को ईरान का हाकिम बना कर भेजा और इस्माइली गिरोह को दबाने का काम दिया। हलाकू खान ने अपनी चालाकी और बहादुरी के साथ हमेशा के लिए इस गिरोह का नाम ओ निशान मिटा दिया और उस इलाके पे मंगोलों का कब्ज़ा और भी मज़बूत कर दिया।
इस्माइलियों का खात्मा करने के बाद हलाकू खान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बग़दाद की ओर कूच कर गया। बग़दाद में उन दिनों बड़े झगडे फसाद होते थे। हलाकू की फौजों ने बगदाद पे कब्ज़ा कर शहर लूट लिया, बगदाद के बाद बसरा और कूफ़ा नाम के शहरों को भी बर्बाद कर डाला। इन शहरों में इतना भी नहीं बचा था की सौदागर कोई मामूली कारोबार भी कर सकें। हलाकू की मंगोल फ़ौज से पूरी दुनिया थर्राने लगी। लेकिन हलाकू की भूख फिर भी कम नहीं हुई और उसने शाम देश को निशाना बना डाला। लगातार मिल रही कामयाबियों से हलाकू की हिम्मत बहुत बढ़ गयी और उसने मिस्र देश पे हमला करने का मंसूबा बना डाला। मगर मिस्र और बग़दाद में फ़र्क़ था। मिस्र एक ताक़तवर मुल्क था और उसकी फ़ौज से हलाकू को हार का सामना करना पड़ा। मिस्री फ़ौज ने हलाकू को ऐसी शिकस्त दी, की हलाकू को शाम देश भी छोड़ना पड़ा। इस तरह मिस्र हलाकू की बर्बर मंगोल फ़ौज से बच गया। मगर ईरान हलाकू के हाथ में था जहाँ हलाकू खान ने अपनी मुस्तक़िल हुकूमत क़ायम कर ली।
इस तरह हलाकू ने मंगोल ताक़त का परचम मरते दम तक लहराया और सारी दुनिया ये जान गयी की मंगोल कितने ताक़तवर होते हैं। और मंगोल ताक़त चंगेज़ खान के साथ ही ख़त्म नहीं हो सकती बल्कि उसके पोते और मंगोल नस्ल का हर फौजी दुनिया को अपनी बर्बर ताक़त का जब चाहे स्वाद चख सकता है। हलाकू खान की बर्बरता के किस्से और उसकी लूट के कारनामे आज भी घर घर में सुने सुनाये जाते हैं।
Tuesday, September 20, 2016
Ek kahani canada ki. One story from Canada.
दुनिया भर के देशों की लोक कथाओं में आज, आइये सुनें एक कहानी कनाडा से.
कहानी है ओगोपोगो की। कहते हैं की उसका मन शैतानी बातों से भरा हुआ था
और वो बुरी आत्माओं से बात भी करता था। उसकी आँखें इतनी जंगली और उसकी
बातें इतनी खतरनाक थीं की उसके अपने लोग ही उससे डरने लगे और एक दिन उसे
बहार निकाल दिया गया। वो निर्वासित हो चूका था , उसे इस बात का बहुत दुःख हुआ
गुस्सा भी आया और उसने एक दिन गुस्से में एक बहुत ही सुन्दर सी झील के किनारे कान हे कान
नाम के बुद्धिमान बुज़ुर्ग की उसके घर के पास हत्या कर दी। के जैसे ओगोपोगो के अंदर कोई
शैतान घुस गया था। बुज़ुर्ग की हत्या करने के बाद ओगोपोगो भाग गया। वो डर गया था
की जब लोगों को पता चलेगा तो क्या होगा।
लेकिन ये सब कुछ आसमान से देवताओं ने देख लिया था और वो ओगोपोगो को उसके
किये की सजा देना चाहते थे। उन्होंने ओगोपोगो को एक बड़े से सर्प में बदल दिया और उसी
झील में कैद कर दिया जिसके किनारे पर उसने कान ही कान को मारा था। वो हमेशा के लिए
अपने किये हुए गुनाह की जगह पर रहने को मजबूर हो गया। झील के आस पास रहने वाले लोगो
ने उस सर्प को नहा -आल्टक यानि झील का दानव बोलना शुरू कर दिया। और झील के पानी में यात्रा
करने से पहले लोग इस दानव को बलिदान भी देनें लगे। लेकिन दानव को इन बलिदानों से
तसल्ली नहीं होती थी और वो अक्सर तबाही मचाने लगता था। कभी कभी जब तूफ़ान आता तो
दानव पानी से बाहर निकलता और बड़ी तबाही मचाता, इसमें अक्सर एक दो लोगों की जान चली
जाती। एक बार एक आदमी झील के किनारे अपने घोड़े को नहला धुला रहा था की अचानक नहा - अ ल्टक
ने झील के पानी के अंदर से मुंह निकाला और घोड़े को अंदर खींच लिया। इस तरह झील के दानव का
खौफ बना रहा।
एक दिन वहां गोरे आदमी आये, उन्होंने झील के दानव की कहानी का मज़ाक उड़ाया और वही रहने
लगे, झील के आस पास के पेड़ काटने लगे और ओकानगन झील के ऊपर से लकड़ी का व्यापार
करने लगे। एक दिन एक लकड़ी काटने वाले ने क्या देखा की झील के अंदर से एक लंबी सी गर्दन निकली
घोड़े जैसा उसका सर था और लहरदार लंबी हरे रंग की गर्दन थी। सर्प धीरे से उस आदमी के पास आया और
अपना सर नीचे कर के अपनी बड़ी बड़ी आँखों से उस आदमी को ज़ोर से घूरा, इतने बड़े झील के दानव को
अपने सामने साक्षात देखते ही उस आदमी की सर से पैर तक कंपकपी छूट गयी और वो उलटे पैर भाग खड़ा हुआ।
कुछ दिनों के बाद एक आदमी अपने घोड़ो के साथ झील पार करने उतरा। वो छोटी सी किश्ती में बैठा था
और घोड़े रस्सी से बंधे हुए पानी में किश्ती के पीछे पीछे झील पार कर रहे थे की अचानक घोड़ों ने घबरा कर
चिल्लाना शुरू कर दिया और पानी में सर पैर पटकने लगे , घोड़े किश्ती से बंधे थे इसलिए किश्ती के पलटने
का खतरा हो गया , आदमी ने चाक़ू निकाला और घोड़ों की रस्सियां काट डाली। कश्ती और उसका मालिक तो
बच गए लेकिन घोड़े झील की गहराईयों गुम हो चुके थे। दुबारा कभी किसी को वो घोड़े नहीं दिखे।
तो इस तरह आज के इंसान ने ओकानगन झील के दानव नहा - अ ल्टक से सामना किया। ये दानव आगे भी
कई सालों तक यू ही दीखता रहा। अक्सर ये कटे हुए पेड़ के तने की तरह दिखता पानी के बहाव की उलटी दिशा
में तैरता हुआ। कभी अपनी लंबी गर्दन निकाल कर उड़ते हुए परिंदो को अपने मुंह में दबोच लिया करता। अक्सर
तैरने के उतरने के बाद तैराक गुम हो जाते। नावों पर भी हमले होते।
1942 में जब झील का दानव नज़र आया था तब एक पुराने गीत के आधार पर इसका नाम ओगोपोगो रख दिया गया।
ये अक्सर दीखता है और आज भी ओकानागन झील के पानी में इसकी दहशत ज़िंदा है।
https://en.wikipedia.org/wiki/Ogopogo#/media/File:OgoPogo_crop.jpg
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Great stories
कहानी है ओगोपोगो की। कहते हैं की उसका मन शैतानी बातों से भरा हुआ था
और वो बुरी आत्माओं से बात भी करता था। उसकी आँखें इतनी जंगली और उसकी
बातें इतनी खतरनाक थीं की उसके अपने लोग ही उससे डरने लगे और एक दिन उसे
बहार निकाल दिया गया। वो निर्वासित हो चूका था , उसे इस बात का बहुत दुःख हुआ
गुस्सा भी आया और उसने एक दिन गुस्से में एक बहुत ही सुन्दर सी झील के किनारे कान हे कान
नाम के बुद्धिमान बुज़ुर्ग की उसके घर के पास हत्या कर दी। के जैसे ओगोपोगो के अंदर कोई
शैतान घुस गया था। बुज़ुर्ग की हत्या करने के बाद ओगोपोगो भाग गया। वो डर गया था
की जब लोगों को पता चलेगा तो क्या होगा।
लेकिन ये सब कुछ आसमान से देवताओं ने देख लिया था और वो ओगोपोगो को उसके
किये की सजा देना चाहते थे। उन्होंने ओगोपोगो को एक बड़े से सर्प में बदल दिया और उसी
झील में कैद कर दिया जिसके किनारे पर उसने कान ही कान को मारा था। वो हमेशा के लिए
अपने किये हुए गुनाह की जगह पर रहने को मजबूर हो गया। झील के आस पास रहने वाले लोगो
ने उस सर्प को नहा -आल्टक यानि झील का दानव बोलना शुरू कर दिया। और झील के पानी में यात्रा
करने से पहले लोग इस दानव को बलिदान भी देनें लगे। लेकिन दानव को इन बलिदानों से
तसल्ली नहीं होती थी और वो अक्सर तबाही मचाने लगता था। कभी कभी जब तूफ़ान आता तो
दानव पानी से बाहर निकलता और बड़ी तबाही मचाता, इसमें अक्सर एक दो लोगों की जान चली
जाती। एक बार एक आदमी झील के किनारे अपने घोड़े को नहला धुला रहा था की अचानक नहा - अ ल्टक
ने झील के पानी के अंदर से मुंह निकाला और घोड़े को अंदर खींच लिया। इस तरह झील के दानव का
खौफ बना रहा।
एक दिन वहां गोरे आदमी आये, उन्होंने झील के दानव की कहानी का मज़ाक उड़ाया और वही रहने
लगे, झील के आस पास के पेड़ काटने लगे और ओकानगन झील के ऊपर से लकड़ी का व्यापार
करने लगे। एक दिन एक लकड़ी काटने वाले ने क्या देखा की झील के अंदर से एक लंबी सी गर्दन निकली
घोड़े जैसा उसका सर था और लहरदार लंबी हरे रंग की गर्दन थी। सर्प धीरे से उस आदमी के पास आया और
अपना सर नीचे कर के अपनी बड़ी बड़ी आँखों से उस आदमी को ज़ोर से घूरा, इतने बड़े झील के दानव को
अपने सामने साक्षात देखते ही उस आदमी की सर से पैर तक कंपकपी छूट गयी और वो उलटे पैर भाग खड़ा हुआ।
कुछ दिनों के बाद एक आदमी अपने घोड़ो के साथ झील पार करने उतरा। वो छोटी सी किश्ती में बैठा था
और घोड़े रस्सी से बंधे हुए पानी में किश्ती के पीछे पीछे झील पार कर रहे थे की अचानक घोड़ों ने घबरा कर
चिल्लाना शुरू कर दिया और पानी में सर पैर पटकने लगे , घोड़े किश्ती से बंधे थे इसलिए किश्ती के पलटने
का खतरा हो गया , आदमी ने चाक़ू निकाला और घोड़ों की रस्सियां काट डाली। कश्ती और उसका मालिक तो
बच गए लेकिन घोड़े झील की गहराईयों गुम हो चुके थे। दुबारा कभी किसी को वो घोड़े नहीं दिखे।
तो इस तरह आज के इंसान ने ओकानगन झील के दानव नहा - अ ल्टक से सामना किया। ये दानव आगे भी
कई सालों तक यू ही दीखता रहा। अक्सर ये कटे हुए पेड़ के तने की तरह दिखता पानी के बहाव की उलटी दिशा
में तैरता हुआ। कभी अपनी लंबी गर्दन निकाल कर उड़ते हुए परिंदो को अपने मुंह में दबोच लिया करता। अक्सर
तैरने के उतरने के बाद तैराक गुम हो जाते। नावों पर भी हमले होते।
1942 में जब झील का दानव नज़र आया था तब एक पुराने गीत के आधार पर इसका नाम ओगोपोगो रख दिया गया।
ये अक्सर दीखता है और आज भी ओकानागन झील के पानी में इसकी दहशत ज़िंदा है।
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