दुनिया भर के देशों की लोक कथाओं में आज, आइये सुनें एक कहानी कनाडा से.
कहानी है ओगोपोगो की। कहते हैं की उसका मन शैतानी बातों से भरा हुआ था
और वो बुरी आत्माओं से बात भी करता था। उसकी आँखें इतनी जंगली और उसकी
बातें इतनी खतरनाक थीं की उसके अपने लोग ही उससे डरने लगे और एक दिन उसे
बहार निकाल दिया गया। वो निर्वासित हो चूका था , उसे इस बात का बहुत दुःख हुआ
गुस्सा भी आया और उसने एक दिन गुस्से में एक बहुत ही सुन्दर सी झील के किनारे कान हे कान
नाम के बुद्धिमान बुज़ुर्ग की उसके घर के पास हत्या कर दी। के जैसे ओगोपोगो के अंदर कोई
शैतान घुस गया था। बुज़ुर्ग की हत्या करने के बाद ओगोपोगो भाग गया। वो डर गया था
की जब लोगों को पता चलेगा तो क्या होगा।
लेकिन ये सब कुछ आसमान से देवताओं ने देख लिया था और वो ओगोपोगो को उसके
किये की सजा देना चाहते थे। उन्होंने ओगोपोगो को एक बड़े से सर्प में बदल दिया और उसी
झील में कैद कर दिया जिसके किनारे पर उसने कान ही कान को मारा था। वो हमेशा के लिए
अपने किये हुए गुनाह की जगह पर रहने को मजबूर हो गया। झील के आस पास रहने वाले लोगो
ने उस सर्प को नहा -आल्टक यानि झील का दानव बोलना शुरू कर दिया। और झील के पानी में यात्रा
करने से पहले लोग इस दानव को बलिदान भी देनें लगे। लेकिन दानव को इन बलिदानों से
तसल्ली नहीं होती थी और वो अक्सर तबाही मचाने लगता था। कभी कभी जब तूफ़ान आता तो
दानव पानी से बाहर निकलता और बड़ी तबाही मचाता, इसमें अक्सर एक दो लोगों की जान चली
जाती। एक बार एक आदमी झील के किनारे अपने घोड़े को नहला धुला रहा था की अचानक नहा - अ ल्टक
ने झील के पानी के अंदर से मुंह निकाला और घोड़े को अंदर खींच लिया। इस तरह झील के दानव का
खौफ बना रहा।
एक दिन वहां गोरे आदमी आये, उन्होंने झील के दानव की कहानी का मज़ाक उड़ाया और वही रहने
लगे, झील के आस पास के पेड़ काटने लगे और ओकानगन झील के ऊपर से लकड़ी का व्यापार
करने लगे। एक दिन एक लकड़ी काटने वाले ने क्या देखा की झील के अंदर से एक लंबी सी गर्दन निकली
घोड़े जैसा उसका सर था और लहरदार लंबी हरे रंग की गर्दन थी। सर्प धीरे से उस आदमी के पास आया और
अपना सर नीचे कर के अपनी बड़ी बड़ी आँखों से उस आदमी को ज़ोर से घूरा, इतने बड़े झील के दानव को
अपने सामने साक्षात देखते ही उस आदमी की सर से पैर तक कंपकपी छूट गयी और वो उलटे पैर भाग खड़ा हुआ।
कुछ दिनों के बाद एक आदमी अपने घोड़ो के साथ झील पार करने उतरा। वो छोटी सी किश्ती में बैठा था
और घोड़े रस्सी से बंधे हुए पानी में किश्ती के पीछे पीछे झील पार कर रहे थे की अचानक घोड़ों ने घबरा कर
चिल्लाना शुरू कर दिया और पानी में सर पैर पटकने लगे , घोड़े किश्ती से बंधे थे इसलिए किश्ती के पलटने
का खतरा हो गया , आदमी ने चाक़ू निकाला और घोड़ों की रस्सियां काट डाली। कश्ती और उसका मालिक तो
बच गए लेकिन घोड़े झील की गहराईयों गुम हो चुके थे। दुबारा कभी किसी को वो घोड़े नहीं दिखे।
तो इस तरह आज के इंसान ने ओकानगन झील के दानव नहा - अ ल्टक से सामना किया। ये दानव आगे भी
कई सालों तक यू ही दीखता रहा। अक्सर ये कटे हुए पेड़ के तने की तरह दिखता पानी के बहाव की उलटी दिशा
में तैरता हुआ। कभी अपनी लंबी गर्दन निकाल कर उड़ते हुए परिंदो को अपने मुंह में दबोच लिया करता। अक्सर
तैरने के उतरने के बाद तैराक गुम हो जाते। नावों पर भी हमले होते।
1942 में जब झील का दानव नज़र आया था तब एक पुराने गीत के आधार पर इसका नाम ओगोपोगो रख दिया गया।
ये अक्सर दीखता है और आज भी ओकानागन झील के पानी में इसकी दहशत ज़िंदा है।
https://en.wikipedia.org/wiki/Ogopogo#/media/File:OgoPogo_crop.jpg
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कहानी है ओगोपोगो की। कहते हैं की उसका मन शैतानी बातों से भरा हुआ था
और वो बुरी आत्माओं से बात भी करता था। उसकी आँखें इतनी जंगली और उसकी
बातें इतनी खतरनाक थीं की उसके अपने लोग ही उससे डरने लगे और एक दिन उसे
बहार निकाल दिया गया। वो निर्वासित हो चूका था , उसे इस बात का बहुत दुःख हुआ
गुस्सा भी आया और उसने एक दिन गुस्से में एक बहुत ही सुन्दर सी झील के किनारे कान हे कान
नाम के बुद्धिमान बुज़ुर्ग की उसके घर के पास हत्या कर दी। के जैसे ओगोपोगो के अंदर कोई
शैतान घुस गया था। बुज़ुर्ग की हत्या करने के बाद ओगोपोगो भाग गया। वो डर गया था
की जब लोगों को पता चलेगा तो क्या होगा।
लेकिन ये सब कुछ आसमान से देवताओं ने देख लिया था और वो ओगोपोगो को उसके
किये की सजा देना चाहते थे। उन्होंने ओगोपोगो को एक बड़े से सर्प में बदल दिया और उसी
झील में कैद कर दिया जिसके किनारे पर उसने कान ही कान को मारा था। वो हमेशा के लिए
अपने किये हुए गुनाह की जगह पर रहने को मजबूर हो गया। झील के आस पास रहने वाले लोगो
ने उस सर्प को नहा -आल्टक यानि झील का दानव बोलना शुरू कर दिया। और झील के पानी में यात्रा
करने से पहले लोग इस दानव को बलिदान भी देनें लगे। लेकिन दानव को इन बलिदानों से
तसल्ली नहीं होती थी और वो अक्सर तबाही मचाने लगता था। कभी कभी जब तूफ़ान आता तो
दानव पानी से बाहर निकलता और बड़ी तबाही मचाता, इसमें अक्सर एक दो लोगों की जान चली
जाती। एक बार एक आदमी झील के किनारे अपने घोड़े को नहला धुला रहा था की अचानक नहा - अ ल्टक
ने झील के पानी के अंदर से मुंह निकाला और घोड़े को अंदर खींच लिया। इस तरह झील के दानव का
खौफ बना रहा।
एक दिन वहां गोरे आदमी आये, उन्होंने झील के दानव की कहानी का मज़ाक उड़ाया और वही रहने
लगे, झील के आस पास के पेड़ काटने लगे और ओकानगन झील के ऊपर से लकड़ी का व्यापार
करने लगे। एक दिन एक लकड़ी काटने वाले ने क्या देखा की झील के अंदर से एक लंबी सी गर्दन निकली
घोड़े जैसा उसका सर था और लहरदार लंबी हरे रंग की गर्दन थी। सर्प धीरे से उस आदमी के पास आया और
अपना सर नीचे कर के अपनी बड़ी बड़ी आँखों से उस आदमी को ज़ोर से घूरा, इतने बड़े झील के दानव को
अपने सामने साक्षात देखते ही उस आदमी की सर से पैर तक कंपकपी छूट गयी और वो उलटे पैर भाग खड़ा हुआ।
कुछ दिनों के बाद एक आदमी अपने घोड़ो के साथ झील पार करने उतरा। वो छोटी सी किश्ती में बैठा था
और घोड़े रस्सी से बंधे हुए पानी में किश्ती के पीछे पीछे झील पार कर रहे थे की अचानक घोड़ों ने घबरा कर
चिल्लाना शुरू कर दिया और पानी में सर पैर पटकने लगे , घोड़े किश्ती से बंधे थे इसलिए किश्ती के पलटने
का खतरा हो गया , आदमी ने चाक़ू निकाला और घोड़ों की रस्सियां काट डाली। कश्ती और उसका मालिक तो
बच गए लेकिन घोड़े झील की गहराईयों गुम हो चुके थे। दुबारा कभी किसी को वो घोड़े नहीं दिखे।
तो इस तरह आज के इंसान ने ओकानगन झील के दानव नहा - अ ल्टक से सामना किया। ये दानव आगे भी
कई सालों तक यू ही दीखता रहा। अक्सर ये कटे हुए पेड़ के तने की तरह दिखता पानी के बहाव की उलटी दिशा
में तैरता हुआ। कभी अपनी लंबी गर्दन निकाल कर उड़ते हुए परिंदो को अपने मुंह में दबोच लिया करता। अक्सर
तैरने के उतरने के बाद तैराक गुम हो जाते। नावों पर भी हमले होते।
1942 में जब झील का दानव नज़र आया था तब एक पुराने गीत के आधार पर इसका नाम ओगोपोगो रख दिया गया।
ये अक्सर दीखता है और आज भी ओकानागन झील के पानी में इसकी दहशत ज़िंदा है।
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