Thursday, September 22, 2016

Ek kahani Mongol Ki. One Story from Mongolia

हलाकू खान की कहानी बड़ी दिलचस्प है. नाम सुन के लगता है की जैसे किसी खतरनाक से इंसान की बात हो रही हो।
हलाकू, यानी जो मार के हलाक़ कर दे। #ghengiz khan, #changez khan, #mongol history
पता नहीं उसका ये नाम किस ने रखा था लेकिन ये बात सच है की वो एक मंगोल लड़ाका था, वो चंगेज़ खान का पोता था।  चंगेज़ खान के बेटे तावली खान के तीन बच्चे थे जिनमे एक मंगोल खान था जिसने काराकोरम की पहाड़ियों में अपना महल बनाया था और वहीं से अपनी पूरी मंगोल सल्तनत पे नज़र रखता था।  दूसरा बच्चा था क़ुबलाई खान। जिसने चीन में अपनी फ़ौज के साथ डेरा  रखा था और तीसरा लड़का हलाकू खान था।

मंगोल खान के इलाके से शुमाली ईरान का कुछ हिस्सा जुड़ा था जहाँ एक इस्माइली गिरोह हषाशीन ने लोगो को बड़ा परेशान कर रखा था।  चूँकि ये इलाक़ा मंगोलों की हुकूमत के दायरे में पड़ता था इसलिए वहां के लोगों ने मंगोल खान से फर्याद की के उनको इस गिरोह से छुटकारा दिलाया जाये।  मंगोल खान ने तुरंत  अपने बाशिंदों की फरियाद सुनी और हलाकू खान को ईरान का हाकिम बना कर भेजा और इस्माइली गिरोह को दबाने का काम दिया।  हलाकू खान ने अपनी चालाकी और बहादुरी के साथ हमेशा के लिए इस गिरोह का नाम ओ निशान मिटा दिया और उस इलाके पे मंगोलों का कब्ज़ा और भी मज़बूत कर दिया।

इस्माइलियों का खात्मा करने के बाद हलाकू खान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बग़दाद की ओर कूच कर गया। बग़दाद में उन दिनों बड़े झगडे फसाद होते थे। हलाकू की फौजों ने बगदाद पे कब्ज़ा कर शहर लूट लिया, बगदाद के बाद बसरा और कूफ़ा नाम के शहरों को भी बर्बाद कर डाला।  इन शहरों में इतना भी नहीं बचा था की सौदागर कोई मामूली कारोबार भी कर सकें। हलाकू की मंगोल फ़ौज से पूरी दुनिया थर्राने लगी। लेकिन हलाकू की भूख फिर भी कम नहीं हुई और उसने शाम देश को निशाना बना डाला। लगातार मिल रही  कामयाबियों से हलाकू की हिम्मत  बहुत बढ़ गयी और उसने मिस्र देश पे हमला करने का मंसूबा बना डाला। मगर मिस्र और बग़दाद में फ़र्क़ था।  मिस्र एक ताक़तवर मुल्क था और उसकी फ़ौज से हलाकू को हार का सामना करना पड़ा। मिस्री फ़ौज ने  हलाकू को ऐसी शिकस्त दी, की हलाकू को शाम देश भी छोड़ना पड़ा। इस तरह मिस्र हलाकू की बर्बर मंगोल फ़ौज से बच गया। मगर ईरान हलाकू के हाथ में था जहाँ हलाकू खान ने अपनी मुस्तक़िल हुकूमत क़ायम कर ली।

इस तरह हलाकू ने मंगोल ताक़त का परचम मरते दम तक लहराया और सारी दुनिया ये जान गयी की मंगोल कितने ताक़तवर होते हैं। और मंगोल ताक़त चंगेज़ खान के साथ ही ख़त्म नहीं हो सकती बल्कि उसके पोते और मंगोल नस्ल का हर फौजी दुनिया को अपनी बर्बर ताक़त का जब चाहे स्वाद चख सकता है। हलाकू खान की बर्बरता के किस्से और उसकी लूट के कारनामे आज भी घर घर में सुने सुनाये जाते हैं।



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